Monday, March 24, 2014

चुनाव का मौसम

        आजकल चुनाव का मौसम क्या खूब चल रहा है ! जिसे देखिये इसी की चर्चा है | कांग्रेस को कुछ जानकार इस बार पिटा हुआ मोहरा मान रहे हैं तो कुछ लोग अभी भी केजरीवाल राग अलाप रहे हैं | इन सबमें जो पार्टी आगे नज़र आ रही है, वो भाजपा है | मोदी इस समय अपने प्रतिद्वंदियों से काफी आगे दिख रहे हैं, मगर कुछ बातें जो पार्टी के अन्दर घट रही हैं; वो इस लोकप्रियता को सत्ता के सिंहासन तक ले जाने में रुकावट न बन जाएं | सबसे अहम् बात है पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का टिकट न मिलने पर रूठना और बागी तेवर अपनाना | हालांकि इनमें से कई नेता टिकट के स्वाभाविक उम्मीदवार थे | जसवंत सिंह, हरेन पाठक, लालजी टंडन, लालमुनी चौबे, नवजोत सिंह सिद्धू आदि को टिकट न मिलना इस बात का प्रमाण है की भाजपा के अन्दर सब-कुछ ठीक नहीं है | भले ही सब कुछ रणनीति के अंतर्गत किया गया हो, पर कम से कम इन नेताओं को विश्वास में जरूर लेना चाहिए था | एक तरफ जहां भाजपा में दूसरे दलों से आने के लिए होड़ मची है और जो नेता आ रहे हैं उन्हें टिकट मिलना और दूसरी तरफ पार्टी के पुराने नेताओं की अवहेलना करना निसंदेह पार्टी के लिए उचित नहीं है | कहीं इसके पीछे ये तो नहीं कि जो नेता बाद में किसी बात पर अडंगा लगा सकते हैं, उन्हें पहले ही रास्ता दिखाया जा रहा है !
       अब अन्य पार्टियों की भी बात कर लें | कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेता जैसे जगदम्बिका पाल, सतपाल महाराज, सोनाराम आदि कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम चुके हैं | कई नेता चुनाव से परहेज कर रहे थे पर हाईकमान के दबाव में मैदान में उतर रहे हैं | टिकट की मारामारी यहाँ उतनी नहीं है जितनी भाजपा और आम आदमी पार्टी में है | आप आदमी पार्टी में टिकट के लिए कई जगह इनके अपने ही कार्यकर्ता नाराज़ है और वे पैसे लेकर टिकट बेचने का आरोप लगा रहे हैं | तीसरा मोर्चा इस बार भी फुसफुसा रहा है पर इसका वास्तविक अंजाम तो चुनाव बाद ही पता लगेगा |
      सबसे रोचक बात ये है कि जो नेता कल किसी अन्य दलों से दूसरे दल या पार्टी में शामिल हुए हैं, उनकी भाषा अचानक बदलना | कल तक जिसे गालियाँ देते, आरोप लगाते थकते नहीं थे और टी.वी. चैनलों पर तमाम बुराइयां गिनाते थे; आज उनकी तारीफ़ में खूब कसीदे पढ़ रहे हैं | इतनी जल्दी और एकाएक ह्रदय-परिवर्तन तो डाकू अंगुलिमाल का भी नहीं हुआ था | वाह! इस चुनावी मौसम का जनता खूब आनंद ले रही है | चलिए हम सभी मिलकर कहते हैं - लोकतंत्र की जय.....

Sunday, March 16, 2014

हास्यकविता/ जोरू का गुलाम

     मित्रों ! होली के अवसर पर एक हास्य - कविता का आडियो प्रस्तुत कर रहा हूँ | मजे की बात ये है कि ये रचना मैंने उस समय लिखी थी जब अभी मेरी शादी नहीं हुई थी | आशा है आप को ये जरूर पसंद आयेगी.....
                        आप सभी को होली की शुभकामनाएं...
      इस रचना का असली आनंद सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि नीचे दिए गए लिंक पर इसे जरूर सुनें | आप से अनुरोध है कि आप मेरे Youtube के Channel पर भी Subscribe और Like करने का कष्ट करें...

भयवश नहीं परिस्थितिवश मैं करता हूँ सब काम।
फ़िर भी लोग मुझे कहते हैं जोरू का गुलाम.......।

सुबह अगर बीबी सोई हो, चाय बनाना ही होगा;
बनी चाय जब पीने को तब उसे जगाना ही होगा;
चाय बनाना शौक है मेरा हो सुबह या शाम.......
फ़िर भी लोग मुझे कहते हैं जोरू का गुलाम.......।

मूड नहीं अच्छा बीबी का फ़िर पति का फ़र्ज है क्या;
बना ही लेंगे खाना भी हम आखिर इसमें हर्ज है क्या;
इसी तरह अपनी बीबी को देता हूँ आराम.....
फ़िर भी लोग मुझे कहते हैं जोरू का गुलाम.......।

वो मेरी अर्धांगिनी है इसमें कोई क्या शक है;
इसीलिये तनख्वाह पे मेरे केवल उसका ही हक है;
मेरा काम कमाना है बस खर्चा उसका काम.....
फ़िर भी लोग मुझे कहते हैं जोरू का गुलाम.......।

                          आप सभी को होली की शुभकामनाएं...

Saturday, March 1, 2014

भारत की कमजोर गेंदबाजी का सच


          आजकल भारतीय क्रिकेट टीम एक नए दौर से गुजर रही है | टीम में नए खिलाड़ी ज्यादा हैं जो कुछ समय बाद ही अनुभव के साथ परिपक्व होंगे | लेकिन एक बात जो गौर करने वाली है वह है टीम में अच्छे तेज गेंदबाजों का अभाव | आखिर इसकी वजह क्या है ? एक बड़ी वजह है आई.पी.एल. | देश के कई गेंदबाज अब केवल आई.पी.एल. के लिए खेलकर इतना कमा रहे हैं कि उनके लिए अब देश महत्वपूर्ण नहीं रह गया है | वे आई.पी.एल. के समय एकदम ठीक रहते हैं पर भारत की टीम के लिए अनफिट रहते हैं, उन्हें चोट लगी होती है | एक नाम नहीं है -प्रवीण कुमार, इरफान खान, आर.पी.सिंह, मुनाफ पटेल, गोनी आदि कई ऐसे खिलाड़ी है | बल्लेबाजी में तो गनीमत है पर गेंदबाजी में भारत के पिछड़ने का यही मुख्य कारण अब नज़र आ रहा है | देश के बेहतरीन तेज गेंदबाज अब भारत के टीम में नहीं आना चाहते हैं क्योकि कम समय में खेलकर जब ज्यादा पैसा  मिल रहा हो तो कोई साल भर पसीना क्यों बहाए ?  कपिलदेव , श्रीनाथ, चेतन शर्मा, मदन लाल , रोजर बिन्नी, मनोज प्रभाकर, करसन घावरी आदि जैसे तेज गेंदबाज कहां है जो अपना पूरा दमखम देश के लिए लगा दें | एकदिवसीय मैचों में तो अंतिम ओवरों में आजकल बुरा हाल होता है | गेंदबाज पिटते रहते हैं  और  यार्कर, स्लो बाल आदि वेरिएशन के बदले गुडलेंथ बाल या फुलटास फेकते रहते हैं | कई बार तो क्षेत्ररक्षण के अनुसार ही बाल नहीं होती | बालिंग कोच क्यों रखे गए हैं, ये पूछनेवाला कोई नहीं है | आई.पी.एल. में फिक्सिंग का अलग ही गुल खिला हुआ है जिसकी वजह से श्रीसंत जैसे कई खिलाडियों ने स्वयं अपनी ज़िंदगी तबाह कर ली है | क्या कोई रास्ता बचा है जो इस खेल को देशप्रेम से जोड़ते हुए आगे ले जाएगा ? खिलाड़ी, कोच, बोर्ड अपनी जिम्मेदारी कब समझेंगे ? मेरे ख्याल से जो खिलाड़ी देश के लिए अनफिट हो और केवल आई.पी.एल. के लिए फिट होकर अवतरित होता हो उसपर रोक लगनी चाहिए तभी भारत की गेंदबाजी में सुधार हो सकता है अन्यथा केवल बचे-खुचे खिलाड़ियों के दम पर टेस्ट श्रृंखला या कोई कप जीतना बहुत मुश्किल होगा और कभी जीत भी गए तो ये संयोग मात्र ही होगा | आप का क्या विचार है ?